हरीश थपलियाल, टीवी पत्रकार
देहरादून में उद्यान, कृषि, गन्ना एवं राजस्व विभाग के मान्यता प्राप्त संगठनों की समन्वय समिति के आह्वान पर गुरुवार को डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं फार्मर रजिस्ट्री से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर परेड ग्राउंड से सचिवालय तक शांतिपूर्ण एवं अनुशासित कूच निकाला गया।
इस कूच में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए कार्मिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और अपनी मांगों को मजबूती से उठाया। पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
कूच से पूर्व सचिव कृषि के निर्देश पर निदेशक उद्यान एवं कृषि विभाग द्वारा समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की गई। इस दौरान समिति ने जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं को विस्तार से रखा। विभागीय अधिकारियों ने इन समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए जायज मांगों के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया।

कूच के उपरांत समिति ने सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह के माध्यम से मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार को संबोधित ज्ञापन सौंपा। सिटी मजिस्ट्रेट ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए जल्द ही राजस्व परिषद स्तर पर वार्ता आयोजित कराने का भरोसा दिलाया।
इस कूच का संचालन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष अरुण पांडे के मार्गदर्शन में किया गया। परिषद के पदाधिकारी रविंद्र चौहान, हर्षदेव जोशी और पिंकेश रावत की सक्रिय भूमिका रही। समन्वय समिति के मुख्य संयोजक शुभम आर्य के नेतृत्व में अर्जुन सिंह परवाल, विजयपाल मेहता, सुरेश चंद्र डबराल और दिनेश प्रसाद सेमल्टी सहित कई संयोजकों एवं सह संयोजकों हीरा बल्लभ जोशी, श्याम सिंह, कृष्णपाल चौहान और विजय कुमार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।इसके अलावा देवेश घिल्डियाल, मेजर सिंह चौहान और देवेंद्र सिंह असवाल सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भी सक्रिय सहभागिता की।समिति ने शासन को समस्याओं के समाधान के लिए 15 दिन का समय देते हुए आशा जताई है कि जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
क्या है उत्तराखंड में डिजिटल क्रॉप का उपयोग
उत्तराखंड में डिजिटल क्रॉप का मतलब आधुनिक डिजिटल तकनीकों की मदद से खेती को अधिक स्मार्ट, सटीक और लाभदायक बनाना है। यह पारंपरिक खेती को टेक्नोलॉजी से जोड़ता है। पहाड़ी राज्य होने के कारण यहाँ इसका उपयोग खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है।
1. सटीक खेती (Precision Farming)
सेंसर, GPS और ड्रोन के जरिए खेत की स्थिति (मिट्टी, नमी, तापमान) की जानकारी ली जाती है। इससे किसान सही मात्रा में पानी, खाद और दवा का उपयोग कर पाते हैं
2. मौसम आधारित खेती
मोबाइल ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से मौसम की सटीक जानकारी मिलती है
बारिश, पाला या सूखे की चेतावनी पहले ही मिल जाती है
3. ड्रोन तकनीक का उपयोग
फसलों की निगरानी, रोग पहचान और स्प्रे के लिए ड्रोन का इस्तेमाल।
पहाड़ी इलाकों में जहां पहुंच मुश्किल है, वहां यह बहुत उपयोगी है
4. मिट्टी परीक्षण और डेटा विश्लेषण
डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड के जरिए मिट्टी की गुणवत्ता का डेटा मिलता है। उसी आधार पर फसल और उर्वरक का चयन किया जाता है
5. ऑनलाइन मार्केटिंग और बिक्री
किसान अपनी फसल को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेच सकते हैं
बिचौलियों की भूमिका कम होती है और बेहतर दाम मिलता है
6. स्मार्ट सिंचाई (Smart Irrigation)
ऑटोमेटेड सिंचाई सिस्टम से पानी की बचत होती है
खासकर पानी की कमी वाले पहाड़ी क्षेत्रों में लाभकारी
7. फसल बीमा और निगरानी
सैटेलाइट डेटा से फसल का आकलन
नुकसान होने पर बीमा क्लेम प्रक्रिया आसान होती है