उत्तराखंड आंदोलन की खौफनाक यादें आज भी सहम जाते हैं… आंदोलनकारी!

हरीश थपलियाल टीवी पत्रकार

 

फाइल फोटो….. आभार सोशल मीडिया

देहरादून। उत्तराखंड देश का 27वां राज्य है, जो 9 नवंबर 2000 को बना था। कई आंदोलन के बाद यूपी से अलग होकर राज्य बना। उत्तराखंड बनने में कई लोगों की जान गई, जिसका प्रमाण इन मामलों की न्यायिक जांच और कोर्ट में चले मुकदमें हैं। राज्य को बनाने में हुए आंदोलन में बच्चों, बड़ों और महिलाओं की शहादत हुई। उत्तराखंड में हर साल 9 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस प्रदेश के सभी जिलों में मनाया जाता है।उत्तराखंड राज्य को बने 25 साल पूरे होने वाले हैं। कई आंदोलनकारी दुनिया छोड़कर जा चुके हैं।

 

आंदोलन की याद करके सहम जाते हैं

 

उत्तराखंड बनाने में जिन लोगों का अहम योगदान रहा है उनमें से कुछ लोग आज भी आंदोलन के वह दृश्य सोच कर सहम जाते हैं। आंदोलनकारी सतीश जोशी आज भी गोली कांड, लाठी चार्ज, रामपुर तिराहा आदि की घटनाओं को याद करते हैं। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय संगठन मंत्री सतीश जोशी के सामने रामपुर तिराहा, मंसूरी और खटीमा की घटनाएं हुई थीं।

सरकार को स्थापना दिवस पर क्यों आती है या

सतीश जोशी मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा की घटना को लेकर बताते हैं कि वह उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए हरिद्वार से 12 बसें लेकर दिल्ली के लिए जा रहे थे। सभी बसों को मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा के पास रोक गया था जहां कई लोगों की शहादत हुई। इस आंदोलन में स्कूल पढ़ने वाले बच्चे, महिलाएं, युवक और लोगों ने भी अपनी शहादत दी, लेकिन जिन सपनों को लेकर उत्तराखंड की स्थापना की गई थी वह आज भी पूरे नहीं हुए। स्थापना दिवस आते ही सरकार को आंदोलनकारियों की याद आती है।

 

 

 

सतीश जोशी बताते हैं कि इस आंदोलन में खटीमा और मंसूरी में महिलाओं को 3 नॉट 3 की गोली मारी गई। रामपुर तिराहा की घटना में उनकी बगल में एसएस रावत को भी गोली लगी थी जो कमर से होते हुए बेल्ट में फंस गई थी। सतीश केमुताबिक आंदोलनकारियों ने नई राज्य की मांग इसलिए उठाई ताकि यहां के लोगों का विकास हो, लेकिन आज केवल बाहरी लोगों का ही विकास हो रहा है। जिन सपनों को लेकर इस राज्य की स्थापना हुई, वह आज भी अधूरे हैं।

 

 

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