अग्निवीरों के जोश से गूंजा हल्द्वानी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बढ़ाया हौसला।

 

यूथ फाउंडेशन के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल से बातचीत करते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

 

हरीश थपलियाल, टीवी पत्रकार 

देहरादून। हल्द्वानी की पावन धरती उस क्षण गौरव और उत्साह से भर उठी, जब राजनाथ सिंह का आगमन हुआ और देवभूमि उत्तराखंड के चयनित अग्निवीरों ने “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। यह दृश्य केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि राष्ट्रभक्ति, समर्पण और युवाशक्ति का जीवंत प्रतीक बन गया।

अग्निवीरों के साथ रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और सीएम पुष्कर धामी एवम यूथ फाउंडेशन के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल की ग्रुप फोटो

रक्षामंत्री ने अपने संबोधन में चयनित अग्निवीरों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे केवल सेना में शामिल नहीं हो रहे, बल्कि भारत माता की रक्षा का एक पवित्र दायित्व अपने कंधों पर ले रहे हैं। उनके शब्दों में गर्व और विश्वास स्पष्ट झलक रहा था,यह विश्वास कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

 

इस अवसर पर पुष्कर सिंह धामी ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को विशेष बनाया। उन्होंने चयनित अग्निवीरों को तिलक लगाकर शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह परंपरा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में वीरता और कर्तव्य के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

 

इन युवाओं की सफलता के पीछे यूथ फाउंडेशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संस्था के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल ने बताया कि इस वर्ष उनके 752 अभ्यर्थियों में से 710 का चयन अग्निवीर भर्ती में हुआ है,जो अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह संस्था निःशुल्क प्रशिक्षण देकर युवाओं को लिखित और शारीरिक परीक्षाओं के लिए तैयार करती है और अब तक 15 हजार से अधिक युवाओं को सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस में सेवा का अवसर दिला चुकी है।

 

रक्षामंत्री ने कर्नल कोठियाल के इस राष्ट्रसेवा कार्य की सराहना की और चयनित अग्निवीरों के साथ समूह चित्र भी खिंचवाया। यह क्षण उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया, जो देशसेवा के मार्ग पर अग्रसर हैं।

 

उल्लेखनीय है कि कर्नल अजय कोठियाल न केवल एक अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं, बल्कि एवरेस्ट विजेता भी रह चुके हैं। केदारनाथ आपदा के बाद केदारनाथ के पुनर्निर्माण में उनके योगदान को आज भी सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।

 

यह पूरा आयोजन केवल एक स्वागत समारोह नहीं था, बल्कि यह संदेश देने वाला एक प्रेरक क्षण था कि जब युवा संकल्प लेते हैं और सही मार्गदर्शन मिलता है, तो वे असंभव को भी संभव बना सकते हैं। देश के इन नवयुवकों की ऊर्जा और समर्पण ही भारत को एक सशक्त और सुरक्षित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।

 

 

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