आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का बढ़ता आक्रोश, मानदेय, पेंशन और कटौती पर सरकार से जवाब की मांग

 

 

 

 

 

 

चिन्यालीसौड़ में अपनी मांगो को लेकर कार्य बहिष्कार में बैठी आँगनबाड़ी कार्यकत्रियां

 

हरीश थपलियाल टीवी पत्रकार 

देहरादून। उत्तराखण्ड की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आवाज़ बुलंद कर दी है। प्रदेश भर की हजारों आंगनबाड़ी बहनों ने एकजुट होकर सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि वे वर्षों से समाज के सबसे महत्वपूर्ण वर्ग माताओं और बच्चों की सेवा में लगी हुई हैं, लेकिन उनके मानदेय और सुविधाओं में अपेक्षित सुधार अब तक नहीं किया गया है।

 

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अपनी प्रमुख मांगों में मानदेय बढ़ोतरी को सबसे अहम मुद्दा बताया है। उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ विकासखंड की आंगनबाड़ी कार्यकत्री बिंद्रा राणा, गीता कैंतुरा, दुर्गा, सरिता, मंजू ने बताया कि वर्तमान महंगाई को देखते हुए उनका मानदेय बेहद कम है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि मानदेय में कम से कम 2500 रुपये की बजटरी वृद्धि की जाए, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से कुछ राहत मिल सके।

 

इसके अलावा, कार्यकत्रियों ने सेवानिवृत्ति से जुड़ी समस्याओं को भी गंभीर बताया है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा 10 लाख रुपये की सेवानिवृत्ति सहायता का शासनादेश (जीओ) जारी होने के बावजूद विभाग द्वारा 200 रुपये की कटौती का प्रस्ताव लाया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि इस प्रकार की कटौती को लागू किया गया, तो वे इसका कड़ा विरोध करेंगी। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि उनके खातों से 300 रुपये की किसी भी प्रकार की अनावश्यक कटौती न की जाए।

 

पेंशन व्यवस्था को लेकर भी आंगनबाड़ी बहनों में गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने मांग रखी है कि सेवानिवृत्ति के बाद प्रत्येक कार्यकर्ता और सहायिका को कम से कम 5000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

 

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का यह भी कहना है कि वे बिना किसी अतिरिक्त अर्हता के वर्षों से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं, इसलिए उनके अनुभव और सेवा को ध्यान में रखते हुए उन्हें सभी लाभ स्वतः मिलने चाहिए, न कि जटिल प्रक्रियाओं और शर्तों में उलझाया जाए।

 

प्रदेशभर में इन मांगों को लेकर धीरे-धीरे आंदोलन का स्वर तेज होता जा रहा है। कई स्थानों पर बैठकों और ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जा रही है। आंगनबाड़ी बहनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगी।

सरकार इन मांगों पर कितना गंभीर रुख अपनाती है और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

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