
हरीश थपलियाल, टीवी पत्रकार
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में मंगलवार को कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था, सेवा और सम्मान का अनूठा संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने देशभर से आए शिवभक्त कांवड़ियों का पुष्पवर्षा, चरण प्रक्षालन और भोजन परोसकर आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवा शिविर का शुभारंभ किया तथा कांवड़ यात्रा के सफल संचालन में योगदान देने वाले पाँच पुलिसकर्मियों और पाँच पर्यावरण मित्रों को सम्मानित किया

मुख्यमंत्री के हरिद्वार आगमन पर हरकी पैड़ी से लेकर कांवड़ यात्रा मार्ग तक हेलीकॉप्टर से शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा की गई। इसके बाद अलकनंदा होटल परिसर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने पाँच कांवड़ियों का चरण प्रक्षालन कर उनका सम्मान किया। उन्होंने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविर का उद्घाटन कर वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण किया और श्रद्धालुओं को अपने हाथों से भोजन भी परोसा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि देवभूमि आने वाले प्रत्येक शिवभक्त को सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक वातावरण मिले। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का विराट पर्व है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष अब तक एक करोड़ से अधिक शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, श्रीराम जन्मभूमि, केदारनाथ पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ मास्टर प्लान जैसी परियोजनाओं के माध्यम से देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए यात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, एंबुलेंस, स्वास्थ्य शिविर और आपातकालीन सहायता जैसी व्यापक व्यवस्थाएँ की गई हैं। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अनुशासन एवं मर्यादा का पालन करने की अपील भी की।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के सफल संचालन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पाँच पुलिसकर्मियों और पाँच पर्यावरण मित्रों को सम्मानित करते हुए उनके सेवा भाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन सभी कर्मयोगियों के प्रति राज्य की कृतज्ञता का प्रतीक है, जो यात्रा को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने में दिन-रात जुटे हैं। इस अवसर पर संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़ियों की उपस्थिति रही।