BIG BREAKING:16 की उम्र में अन्याय का आरोप, 23 साल के बेटे के हक की लड़ाई… जैनी ने फिर मांगी CBI जांच!

 

देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस करती जैनी….

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हरीश थपलियाल

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत से जुड़ा पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। जैनी ने सामने आकर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे प्रकरण की नए सिरे से सीबीआई जांच कराने की मांग की है। देहरादून पहुंची जैनी ने भावुक अंदाज में साफ कहा कि जब तक उन्हें और उनके बेटे को न्याय नहीं मिलता, वह देहरादून छोड़कर वापस नहीं जाएंगी।

 

जैनी का आरोप है कि जब वह महज 16 वर्ष की थीं, तब उनके साथ यौन शोषण हुआ। उन्होंने इस मामले में हरक सिंह रावत की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया, जिनमें मधुबन होटल, मसूरी, एक हॉस्टल और यमुना कॉलोनी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि वह करीब दो महीने तक यमुना कॉलोनी में भी रही थीं।

 

जैनी ने पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि कम उम्र और परिस्थितियों की जानकारी न होने के कारण उस समय उनसे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जिनकी वास्तविकता से वह आज भी अनजान हैं।

 

उन्होंने वर्ष 2016 की एक कथित घटना का भी जिक्र किया। जैनी के आरोपों के मुताबिक, उन्हें ग्रीन पार्क स्थित आवास पर बुलाया गया था, जहां उनके साथ दोबारा दुष्कर्म हुआ। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। संबंधित पक्ष का जवाब और निष्पक्ष जांच इस पूरे मामले में बेहद महत्वपूर्ण है।

 

इस लड़ाई का सबसे भावुक पहलू उनके 23 वर्षीय बेटे के अधिकारों से जुड़ा है। जैनी का कहना है कि उनका बेटा आज भी पिता के नाम और उससे जुड़े अधिकारों से वंचित है। उन्होंने कहा कि अब उनकी चुप्पी टूट चुकी है और वह अपने बेटे के भविष्य तथा सम्मान के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करेंगी।

 

जैनी ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने कई वर्षों तक परिस्थितियों और परिवार का लिहाज करते हुए अपनी पीड़ा सार्वजनिक नहीं की, लेकिन अब वह अपने बेटे को उसका अधिकार दिलाना चाहती हैं।

 

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी न्याय की गुहार लगाई है। जैनी को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री उनकी बात सुनेंगे और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराएंगे। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा इस प्रकरण का उल्लेख किए जाने के बाद उनके मन में न्याय की उम्मीद जगी है।

 

महेंद्र भट्ट को लेकर पूछे गए सवाल पर जैनी ने अनभिज्ञता जताई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में उनका हरक सिंह रावत से कोई संपर्क नहीं है।

 

अब सवाल सरकार और जांच एजेंसियों से हैँ कि जैनी की स्पष्ट मांग है कि पुराने प्रकरण की दोबारा सीबीआई जांच हो, आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल की जाए और उनके बेटे के अधिकारों पर भी स्थिति स्पष्ट हो।

 

यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि किसी महिला ने इतने वर्षों बाद न्याय की मांग के साथ सामने आने का साहस किया है, तो उसकी शिकायत को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। साथ ही, किसी भी व्यक्ति को जांच और न्यायिक प्रक्रिया से पहले दोषी ठहराना भी उचित नहीं है।

अब निगाहें धामी सरकार पर हैं। क्या जैनी की दोबारा सीबीआई जांच की मांग पर सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी? क्या वर्षों से लंबित सवालों के जवाब सामने आएंगे? और क्या उनके बेटे के अधिकारों को लेकर कोई समाधान निकलेगा?

इन सवालों का जवाब आने वाला समय और निष्पक्ष जांच ही दे पाएगी।

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